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Top posts

  • जैन दर्शन में, तत्त्व ---2

    04 August 2010

    गातांक से आगे....जैन सिद्धान्त में जीव का मुख्य लक्षण उपयोग माना गया है। उपयोग के दो भेद हैं-दर्शन और ज्ञान। दर्शन शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। सामान्य भाषा में दर्शन का अर्थ होता है-किसी पदार्थ को नेत्रों द्वारा देखने की क्रिया। शास्त्रीय...

  • किशनगंज :संघ के दायित्व पर समणी निर्देशिका अक्षयप्रज्ञा जी : 06.08.12

    12 August 2012

    किशनगंज : स्थानीय तेरापंथ भवन में रविवार को विश्वसंत महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रवण जी की विदूषी समणी निर्देशिका अक्षय प्रज्ञा जी ने संघ व संघ के प्रति हमारा क्या दायित्व है, के विषय पर अपने विचारों को रखा.इस कार्यक्रम का आयोजन नेपाल व बिहार के तेरापंथ...

  • धूरी : ईष्या की भावना परिवार टूटने की वजह : 05 Aug 2012

    12 August 2012

    धूरी (संगरूर) श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ व तेरापंथ युवक परिषद की ओर से शांति दूत आचार्य श्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनि अर्हत कुमार के सान्निध्य में टूटते रिश्ते बिखरते परिवार विषय पर स्थानीय सनातन धर्म आश्रम में सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में...

  • दीपावली स्नेह मिलन समारोह

    16 November 2010

    दीपावली स्नेह मिलन समारोहदिनांक ८.११.२०१०. इचलकरंजी.               दीपावली एवं नववर्ष के शुभ अवसर पर तेरापंथ भवन में 'स्नेह मिलन समारोह'  का आयोजन किया गया. श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष  श्री सौभागमल  छाजेड, युवक परिषद् के अध्यक्ष श्री...

  • श्रीमानजी ! आप किस जाती से है ?

    31 August 2010

    हिन्दुस्थान  सहित कई  गरीब मुल्को में आज भी जाति के अनुशार लोकव्यवहार में  भेद-भाव दर्शता है . शहरों कों छोड़ दे तो बदस्तूर यह प्रथा आज भी गावो में धडल्ले से चल रही है ! शिक्षित ओर क्या अशिक्षित सभी ऊँची जाति का होने  का दम्म भरते है, ओर छोटी जातियों...

  • सुज्ञजी ने बहुत गहरा प्रश्न करा - सात तत्व नहिं, नौ तत्वो का उल्लेख

    29 August 2010

    सुज्ञजी ने बहुत गहरा प्रश्न करा कल कि हमारी पोस्ट "जैन दर्शन एवं तत्व -१" कों लेकर जिससे मुझे प्रसन्ता हुए क़ी पाठको में सजगता है ...चुकी जैन इतिहास कों हम कई कड़ीयो में प्रकाशित करते हुए आज ३० वी कड़ी पर पहुचे है >  मूल मकसद है पाठको एवं धर्म जिज्ञासुओ...

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