जैन दर्शन में, तत्त्व ---2
गातांक से आगे....जैन सिद्धान्त में जीव का मुख्य लक्षण उपयोग माना गया है। उपयोग के दो भेद हैं-दर्शन और ज्ञान। दर्शन शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। सामान्य भाषा में दर्शन का अर्थ होता है-किसी पदार्थ को नेत्रों द्वारा देखने की क्रिया। शास्त्रीय...