जसोल चातुर्मास का समारोहपूर्वक समापन
जसोल चातुर्मास का समारोहपूर्वक समापन
जसोल(बालोतरा)त्न कहा जाता है कि विकास की कोई उम्र नहीं होती तथा उपलब्धियों की कोई सीमा नहीं होती। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण का वर्ष 2012 का जसोल चातुर्मास विकास व उपलब्धियों की कसौटी पर हर दृष्टि से खरा उतरा है। तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना के लगभग 250 वर्षों के काल में किसी आचार्य का जसोल में यह पहला चातुर्मास था। यानि तीन-चार पीढिय़ां खप जाने के बाद ही जसोल कस्बे को चातुर्मास का ऐसा अवसर मिल पाया। चातुर्मास के अंतिम दिन मंगल भावना समारोह में आचार्य ने राजा परदेशी का व्याख्यान दिया और कहा कि धर्म ध्यान का यह क्रम बना रहे। चातुर्मास समाप्ति पर जहां धर्मावलंबियों में खुशी की झलक दिखीं वहीं आचार्य की विदाई को लेकर आंखें नम। आचार्य महाश्रमण गुरुवार को जसोल से विहार कर जाएंगे।
बड़े आयोजनों में बही ज्ञान की गंगा: चातुर्मास अवधि में संतजनों की काव्य गोष्ठी तथा तेरापंथ युवक परिषद की ओर से विराट हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया।